काश अपनी भी एक झारा हो

काश अपनी भी एक झारा हो

काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर
एक अंजान पहेली जैसी हो सहेली, जिसका मै एक साहीर
काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर
नैना ही बयाँ कर दे सारे जज्बात, न करनी पड़े मोहब्बत जाहीर
काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर
एक साथ दिल धडके दोनों के, दिल में बसी हो एक दूजे की तस्वीर
काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर
राहे ले जाए कितनी भी दूर, बस एक दूसरे से जुडी हो तक़दीर
काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर
इतनी हसीन हो मोहब्बत, सबकुछ लुटाने को जी चाहे उसके खातीर
काश अपनी भी एक झारा हो और मै उसका वीर

About The Author

Hi there, my name is Pratik Akkawar. I am occasionally a poet, blogger, thinker and an amateur writer; trying to put my thoughts into words and sometimes words into poems. Beside that, I am a day dreamer, lazy reader and patient listener. Life is very much unpredicted and there is a lot to explore in the world. So, breath, smile, laugh and love for you are going to live only once. You can catch me on the associated urls listed below. Thank you for passing by. Stay blessed ! Cheers !!!

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